Description
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस्लाम धर्म क्या है और मुसलमान कौन लोग हैं?
इस्लाम धर्म एक प्राकृतिक और संपूर्ण जीवन पद्धति है जो इंसान को अल्लाह और उसकी मख़लूक़ से अपने रिश्ते पर उचित ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।
यह सिखाता है कि आत्माओं को उन अच्छे कर्मों के माध्यम से सच्ची खुशी और शांति प्राप्त होती है, जिन से अल्लाह की सहमति के साथ समाज और व्यक्ति दोनों को लाभ होता है।
इस्लाम धर्म का संदेश सरल है: केवल एक सच्चे अल्लाह पर ईमान लाना और उसी की इबादत करना।
और पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को उनके अंतिम रसूल के रूप में स्वीकार करना।
"इस्लाम" शब्द का अर्थ है अल्लाह के प्रति समर्पण, और इसके अनुयायियों को "मुसलमान" कहा जाता है, जो किसी भी नस्ल या जातीय पृष्ठभूमि से हो सकते हैं।
जीवन का उद्देश्य क्या है?
अल्लाह ने इंसानों को बिना मकसद के यूँही भटकने के लिए नहीं बनाया।
बल्कि हमारा एक ऊँचा उद्देश्य है - केवल अल्लाह को मानना और उसकी इबादत करना।
ताकि हम अपने पैदा करने वाले के मार्गदर्शन पर चल सकें।
यह मार्गदर्शन हमें जीवन के हर पहलू में सफल और बरकत भरी ज़िंदगी जीने की अनुमति देता है।
इस दुनिया के साथ और आख़िरत में भी।
ईमान वालों के ईमान की परीक्षा यह है कि वह अपनी बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करके अल्लाह की निशानियों पर विचार करे और उसके मार्गदर्शन के अनुसार जीवन व्यतीत करे।
अल्लाह की असीम हिकमत में है कि , उन्होंने इंसानों को इख़्तियार दिया ताकि यह देखा जा सके कि कौन उसकी राह पर स्वेच्छा से चलता है।
अल्लाह कौन हैं?
अल्लाह एक सच्चे ईश्वर का व्यक्तिगत नाम है।
अल्लाह का न कोई साथी है, न बराबरी करने वाला, न माता-पिता और न संतान।
अल्लाह की सभी विशेषताएँ परिपूर्ण हैं, जैसे: सृष्टिकर्ता, सबसे रहम करने वाला, सबसे शक्तिशाली, सबसे न्यायप्रिय, सबसे बुद्धिमान और सबसे जानकार।
कोई भी इंसान या वस्तु अल्लाह की प्रभुता और उसकी ईश्वरीय विशेषताओं में भागीदार नहीं है।
इसलिए, केवल वही सीधे और विशेष रूप से इबादत के लायक है।
मुहम्मद कौन हैं?
मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) लंबे पैगंबरों की श्रृंखला के अंतिम पैगंबर हैं, जिन्हें सभी मानवजाति को केवल अल्लाह की इबादत करने के लिए भेजा गया था।
वह एक आदर्श पिता, पति, शिक्षक, रहनुमा और न्यायाधीश थे, यही नहीं बलिक वह ईमानदार, न्यायप्रिय, दयालु और बहादुर इंसान का बेहतरीन उदाहरण थे।
हालाँकि उनका अत्यधिक सम्मान किया जाता है, लेकिन अन्य पैगंबरों की तरह मुसलमान उनकी इबादत नहीं करते।
हम अल्लाह पर ईमान क्यों रखें?
अल्लाह पर ईमान रखने के कई कारण हैं, जिनमें सरल तर्क (नीचे संक्षेप में दिए गए हैं) और वाह्य शामिल हैं। (अगले भाग में इस की चर्चा की गई है)
– इस ब्रह्मांड की बनावट और उसकी शुरुआत – अल्लाह पर ईमान रखने का एक सरल कारण ब्रह्मांड की बनावट और उसकी उत्पन्न होने की शुरुआत पर चिंतन करना है।
यह ब्रह्मांड आखिर आया कहाँ से?
ब्रह्मांड हमेशा से नहीं था (आधुनिक विज्ञान के अनुसार इसका एक शुरुआत है) और यह न तो खुद से पैदा हो सकता है और न ही शून्य से उत्पन्न हो सकता है।
एक तार्किक निष्कर्ष यह है कि इसे बनाया गया।
ब्रह्मांड के विपरीत, ब्रह्मांड का सृजनकर्ता, ईश्वर, अनन्त है, उसकी कोई शुरुआत नहीं है और वह हमेशा से मौजूद है।
– ब्रह्मांड का क्रम – अल्लाह पर ईमान रखने का एक और सरल कारण ब्रह्मांड के क्रम पर विचार करना है, निम्नलिखित तर्क के आधार पर:
जो कुछ भी व्यवस्थित है, वह बुद्धिमत्ता को दर्शाता है
हमारा सौरमंडल जटिल नियमों, प्रणालियों और पैटर्न के साथ अत्यंत व्यवस्थित है
इसलिए, हमारे ब्रह्मांड में इस प्रकार का व्यवस्था होना एक निर्माता के अस्तित्व और बुद्धिमत्ता को इंगित करती है
कुरआन क्या है?
कुरआन अल्लाह का शब्दशः वचन और मानवजाति के लिए अंतिम वाह्य है।
जो खुले दिल और ईमानदार हैं, उन के लिए कुरआन अल्लाह के अस्तित्व के लिए एक मजबूत तर्क प्रस्तुत करता है।
यह अपनी शैली, ज्ञान, मार्गदर्शन, भाषा की सुंदरता और बलाग़त में बेजोड़ है।
यह अल्लाह का शब्दशः वचन है, जिसे पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को फरिश्ते जिब्रईल के माध्यम से दिया गया।
और यह सभी पिछले वह्यों , जैसे कि इंजील और तौरात से श्रेष्ठ है।
यह इस्लामी शिक्षाओं का मुख्य स्रोत है।
यह हमारे अस्तित्व का उद्देश्य और अल्लाह की सही अवधारणा जैसे कई मुद्दों को स्पष्ट करता है जैसे;
अल्लाह की पसंद व नापसंद वाले कार्य; पैगंबरों की कहानियाँ और उनके सबक;
स्वर्ग, नरक और क़ियामत के दिन का विवरण।
कुरआन के महान चमत्कारों में से एक यह है कि यह 1400 साल पहले नाज़िल होने के बाद अब तक बिलकुल सुरक्षित और अपरिवर्तित है।
इसमें कई वैज्ञानिक और ऐतिहासिक तथ्य भी हैं जो उस समय के लोगों को ज्ञात नहीं थे और हाल ही में खोजे गए हैं।
जो इस बात का प्रमाण है कि यह अल्लाह की ओर सेनाज़िल की गई है।
इस्लाम के मुख्य कर्तव्य क्या हैं?
पहला स्तंभ: ईमान की गवाही। यह घोषित करना कि अल्लाह के सिवा किसी की ईबादत के लायेक नहीं है और मुहम्मद उनके अंतिम पैगंबर हैं।
दूसरा स्तंभ: नमाज़ पढ़ना। इसे दिन में पाँच बार अदा किया जाता है: सुबह, दोपहर, दोपहर बाद, सूर्यास्त के बाद और रात में।
तीसरा स्तंभ: ज़कात – यह एक वार्षिक अनिवार्य दान है जो ज़रूरतमंदों को दिया जाता है और यह कुल वार्षिक बचत का 2.5% हिस्सा होता है।
चौथा स्तंभ: रमज़ान के महीने का रोज़ा रखना। इस महीने में मुसलमान सुबह से सूर्यास्त तक खाने-पीने और वैवाहिक संबंधों से दूर रहते हैं।
पाँचवाँ स्तंभ: हज। हर सक्षम मुसलमान के लिए जीवन में एक बार मक्का की यात्रा करना अनिवार्य है।
मुसलमान ईसा मसीह और अन्य पैगंबरों के बारे में क्या मानते हैं?
अल्लाह ने हज़ारों पैगंबरों को भेजा, हर कौम के लिए कम से कम एक पैगंबर, उसी संदेश के साथ: केवल अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को साझी मत बनाओ।
इनमें से कुछ पैगंबर हैं: आदम, नूह, यूसुफ, इब्राहीम, याकूब, इसहाक, मूसा, ईसा मसीह और मुहम्मद (सभी पर अल्लाह की शांति हो)।
ईसा मसीह का जन्म चमत्कारिक रूप से बिना पिता के हुआ और उन्होंने कई चमत्कार किए – यह सब केवल अल्लाह की इच्छा से हुआ।
ईसा मसीह (अल्लाह की शांति हो उन पर) वह अल्लाह की ओर से भेजे गए महानतम पैगंबरों में से एक थे।
ईसा मसीह न तो ईश्वर हैं, न ईश्वर के पुत्र और न ही त्रिमूर्ति का हिस्सा, क्योंकि यह इस्लाम में अल्लाह की पवित्र शिक्षाओं के खिलाफ है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
· ईसाई शिक्षाओं में कई उदाहरण हैं जहाँ ईसा मसीह, अल्लाह को अपने से अलग एक अस्तित्व के रूप में बात करते और व्यवहार करते हैं। जैसे, ईसा मसीह ईश्वर से प्रार्थना करते हैं - यदि ईसा मसीह स्वयं ईश्वर होते, तो वे किससे प्रार्थना कर रहे होते?
· "ईश्वर का पुत्र" शब्द प्रारंभिक बाइबली भाषाओं में प्रतीकात्मक रूप से "नेक व्यक्ति" के लिए प्रयोग किया गया था - केवल ईसा मसीह के लिए नहीं। समस्या तब उत्पन्न होती है जब इस शब्द का शाब्दिक रूप से या अन्य तरीकों से प्रयोग किया जाता है।
हालाँकि मुसलमान ईसा मसीह (और अन्य सभी पैगंबरों) से प्रेम और सम्मान करते हैं, परंतु वे उनकी ईबादत नहीं करते और न ही उन्हें ईश्वरीय गुण प्रदान करते हैं, क्योंकि यह केवल एक अल्लाह के लिए है।
क्या सभी धर्म एक जैसे हैं?
हालाँकि अधिकांश धर्म अच्छे अच्छे आचरण और दूसरों के प्रति दयालुता जैसी समान शिक्षाएँ देते हैं,
इस्लाम धर्म इस से भी आगे बढ़ कर बिना अल्लाह की एकता और पूर्णता पर समझौता किए अल्लाह की महानता पर जोर देता है।
अन्य धर्मों के विपरीत, इस्लाम मुख्य रूप से यह सिखाता है कि अल्लाह अपनी सृष्टि से पूरी तरह अलग और अनोखा है।
और सभी प्रशंसा और इबादत सीधे और विशेष रूप से उसी के लिए है।
इस्लाम व्यापक है; सरल लेकिन गहरा; इस धर्म की नींव में एक बिलकुल सुरक्षित वाह्य है;
यह अल्लाह के किसी भी पैगंबर को अस्वीकार नहीं करता बल्कि कहता है कि वे सभी एक ही संदेश के साथ आए थे।
मृत्यु के बाद क्या होता है?
मृत्यु इस छोटे से जीवन से अगले हमेशा वाले जीवन में जाने का मार्ग है।
प्रत्येक व्यक्ति को क़ियामत के दिन पुनर्जीवित किया जाएगा और उन से हिसाब लिया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति अल्लाह की इबादत और आज्ञा का पालन करते हुए एक अच्छा और सम्मानजनक जीवन जीता है, तो उसे अल्लाह की रहमत से जन्नत में प्रवेश देकर सम्मानित किया जाएगा।
यदि वे अविश्वास (कुफ़र) को चुनते हैं, तो उनके लिए जहन्नम की आग तैयार है।
यदि कोई ऐसा आख़िरत न होता जहाँ अच्छे लोगों को इनाम और बुरे लोगों को सज़ा मिलती, तो यह अल्लाह के पूर्ण न्याय के खिलाफ होता और जीवन अनुचित होता।
- इस्लाम धर्म में महिलाओं की हैसियत और स्थान किया है?
इस्लाम में, अल्लाह के सामने पुरुषों और महिलाओं के कर्मों के लिए समान इनाम और जवाबदेही के संदर्भ में बराबर माना जाता है।
अल्लाह, जो दोनों लिंगों का सृजनकर्ता है, उस ने उनकी भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए, अलग-अलग भूमिकाएँ और ज़िम्मेदारियाँ सौंपी हैं।
महिलाओं को अत्यंत सम्मान और आदर दिया जाता है, और उनके प्रति किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की अनुमति नहीं है।
क्या मूल पाप की अवधारणा इस्लाम में मौजूद है?
"मूल पाप" की अवधारणा इस्लाम में नहीं है।
अल्लाह न्यायकारी है; कोई भी व्यक्ति उस पाप के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाता जिसका वह स्वयं जिम्मेदार नहीं है।
जिहाद क्या है?
जिहाद का सार यह है कि अपने धर्म के लिए उस तरह संघर्ष और बलिदान किया जाए जो अल्लाह को पसंद हो।
भाषाई रूप से इसका अर्थ "संघर्ष करना" है और यह अच्छे कर्म करने, दान देने या अल्लाह के लिए जंग करने के संदर्भ में भी बयान किया जा सकता है।
सबसे अधिक ज्ञात रूप सैन्य जिहाद है, जिसकी अनुमति समाज की भलाई को बनाए रखने, उत्पीड़न को रोकने और न्याय को बढ़ावा देने के लिए दी गई है।
क्या इस्लाम आतंकवाद का समर्थन करता है?
युद्ध में, निर्दोष गैर-युद्धियों को निशाना बनाना एक घृणित कार्य है जिसे इस्लाम स्पष्ट रूप से मना करता है।
वास्तव में, मुसलमानों को अनावश्यक रूप से पौधों और जानवरों को नुकसान पहुँचाने की भी अनुमति नहीं है, तो निर्दोष मनुष्योंकी हत्या करने का सवाल ही नहीं उठता।
यह केवल इस्लाम में निर्धारित युद्ध के कई नैतिक दिशानिर्देशों में से एक उदाहरण है।
हालाँकि, आतंकवाद और कब्जे के खिलाफ वैध प्रतिरोध के बीच अंतर करना ज़रूरी है, क्योंकि दोनों पूरी तरह अलग हैं।
हलाल भोजन क्या है?
हलाल या वैध भोजन वह है जिसे अल्लाह ने मुसलमानों के लिए खाने की अनुमति दी है।
आम तौर पर, सूअर का मांस और शराब को छोड़ कर अधिकांश खाद्य पदार्थ और पेय हलाल माने जाते हैं।
मांस और मुर्गे-मुर्गियों को मानवीय और सही तरीके से ज़बह किया जाना चाहिए, जिसमें ज़बह से पहले अल्लाह का नाम लेना और जानवरों की तकलीफ को कम करना शामिल है।
इस्लाम धर्म को कौन क़बूल कर सकता है?
अल्लाह ने इस्लाम के दरवाजे सभी इन्सानों के लिए खोल दिए हैं, चाहे उनका अतीत या वर्तमान स्थिति कुछ भी हो। इसलिए, कोई भी किसी भी समय मुसलमान बन सकता है, बस ईमान लाते हुवे और निम्नलिखित ईमान की गवाही को उच्चारित करते हुए:
'मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य ईश्वर नहीं है, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल और पैग़म्बर हैं।'
मुसलमान बनना सृष्टिकर्ता (अल्लाह) की महानता को स्वीकार करना और उसकी आज्ञाओं का पालन करके उसके साथ एक निकट संबंध विकसित करना और बनाए रखना है। यही इस जीवन और अगले जीवन में खुशी और संतोष की ओर ले जाएगा, और जीवन के सही उद्देश्य का एहसास होगा।
